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खुशख़बरी : अगर बिल हो गया पास तो SC कैटेगरी में शामिल भोगता समुदाय हो जाएगा ST

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रांची: 

झारखंड के खूंटी, तमाड़, बुंडू, पोटका, सिल्ली मुरी में पुरान की आबादी है, तो सिमरिया, चतरा, बालूमाथ, गढ़वा, पांकी में भोक्ता समुदाय की आबादी है। भोक्ता खरवार जनजाति की उप जाति हैं। वे अभी दलित की श्रेणी में हैं। इनकी बरसों से मांग रही है कि वे भी आदिवासी हैं। इसलिए उन्हें STका दर्जा दिया जाए। इस संबंध में समय-समय पर मांग उठाने वालों का कहना रहा कि साजिश के तहत 10 अगस्त 1950 में भोगता समुदाय को अलग जाति बनाकर झारखंड प्रदेश अनुसूचित जाति श्रेणी में क्रम संख्या तीन में सूचीबद्ध किया गया। जिसके कारण भोगता समुदाय 74 वर्षों से अपने अस्तित्व की मूल पहचान से वंचित है। उनके लिए खुशखबरी है कि उन्हें SC कैटेगरी से हटाकार ST की सूची में शामिल करने का बिल आज राज्यसभा में पेश कर दिया गया है, अगर यह पास हो गया तो उनकी मुराद पूरी हो जाएगी।

 

 

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने पेश किया बिल

राज्यसभा में सोमवार को जनजातीय कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड राज्य से सम्बंधित संविधान अनुसूचित जातियां और अनुसुचित जनजातियां आदेश संशोधन विधेयक 2022 पेश किया। जिसके मुताबिक अनुसूचित जनजातियों की सूची में क्रम संख्या 16 पर भोगता, देश्वारी, गंझू, दौतलबंदी(द्वालबंदी), पटबंदी, राउत, माझिया, खैरी (खेरी) को खरवार के पर्याय के रूप में प्रविष्टि के तौर पर शामिल करना है। वहीं अनुसूचित जनजातियों की सूची में क्रम संख्या 24 पर मुंडा के पर्याय के रूप में तमरिया को शामिल करना है।

 

पड़ोसी राज्यों में भी रहते हैं भोगता
बता दें कि इस बिल में झारखंड राज्य में अनुसूचित जातियों की सूची में से भोगता समुदाय को हटाने के लिए संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और अनुसूचित जनजातियों की सूचियों से कुछ समुदायों को शामिल करने के लिए संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश 1950 में और संसोधन का प्रस्ताव किया गया था। बता दें कि भोगता समुदाय के लोक देश के झारखंड, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में निवास रहते हैं।